Sunday, August 28, 2016

तुलसी का पूजन कर पायें दोषों से मुक्ति

  • जो भी व्यक्ति तुलसी की माला से किसी भी लक्ष्मी मन्त्र का यथा शक्ति 1 से 11 माला प्रतिदिन जप करे तो धन की प्राप्ति होने लगती है और उसके परिवार में सुख समृद्धि आती है।
  • जो भी व्यक्ति नित्य सुबह के समय स्नान आदि से निवृत होकर तुलसी के नीचे दीपक जलाकर पूजन करेगा। उस जातक के देवदोष समाप्त हो जायेंगे।
  • एक गमले में एक पौधा तुलसी का तथा एक पौधा काले धतूरे का लगायें। इन दोनों पौधों पर प्रतिदिन स्नान आदि से निवृत होकर शुद्ध जल में थोड़ा सा कच्चा दूध मिलाकर अर्पित करें। जो भी व्यक्ति यह प्रयोग नित्य 1 वर्ष तक करेगा उसे पितृदोष से मुक्ति मिल जायेगी। तथा उसको ब्रहमा, विष्णु, महेश, इन तीनों की संयुक्त पूजा फल मिलेगा चूंकि विष्णु प्रिया होने के कारण तुलसी विष्णु रूप है तथा काला धतूरा शिव रूप है एंव तुलसी की जड़ो में ब्रहमा का निवास स्थान माना जाता है।
  • एक छोटा सा चांदी का सर्प बनावाकर। इस सर्प की पूजा जिस दिन चर्तुदशी हो उस दिन स्नान कर तुलसी के पौधे के नीचे, इसे रखकर। इस पर दूध, अक्षत, रोली, आदि लगाकर इसकी पूजा करें। घी का दीपक भी जलायें। जिस समय पूजा करें उस समय साधक का मुख पूर्व दिशा की तरफ होना चाहिए। भोग अर्पित कर दान भी करें। दीपक जब ठण्डा हो जाये तो उसके बाद चाॅदी के सर्प को पूजा करने वाला व्यक्ति ही उठाकर किसी नदीं में प्रवाहित कर दे। इस प्रकार नित्य 40 दिन तक पूजन करने से कालसर्प दोष दूर हो जाता है।


तुलसी विवाह में तुलसी के पौधे और विष्णु जी की मूर्ति या शालिग्राम पाषाण का पूर्ण वैदिक रूप से विवाह कराया जाता है। इस वर्ष तुलसी विवाह का शुभ दिन 1 नवंबर 2016 को है।

* शाम के समय सारा परिवार इसी तरह तैयार हो जैसे विवाह समारोह के लिए होते हैं। 
* तुलसी का पौधा एक पटिये पर आंगन, छत या पूजा घर में बिलकुल बीच में रखें। 
 * तुलसी के गमले के ऊपर गन्ने का मंडप सजाएं। 
* तुलसी देवी पर समस्त सुहाग सामग्री के साथ लाल चुनरी चढ़ाएं।  
* गमले में सालिग्राम जी रखें। 
* सालिग्राम जी पर चावल नहीं चढ़ते हैं। उन पर तिल चढ़ाई जा सकती है। 
* तुलसी और सालिग्राम जी पर दूध में भीगी हल्दी लगाएं।  
* गन्ने के मंडप पर भी हल्दी का लेप करें और उसकी पूजन करें।
* अगर हिंदू धर्म में विवाह के समय बोला जाने वाला मंगलाष्टक आता है तो वह अवश्य करें। 
* देव प्रबोधिनी एकादशी से कुछ वस्तुएं खाना आरंभ किया जाता है। अत: भाजी, मूली़ बेर और आंवला जैसी सामग्री बाजार में पूजन में चढ़ाने के लिए मिलती है वह लेकर आएं। 
* कपूर से आरती करें। (नमो नमो तुलजा महारानी, नमो नमो हरि की पटरानी) 
* प्रसाद चढ़ाएं। 
* 11 बार तुलसी जी की परिक्रमा करें।
*  प्रसाद को मुख्य आहार के साथ ग्रहण करें। 
* प्रसाद वितरण अवश्य करें।
* पूजा समाप्ति पर घर के सभी सदस्य चारों तरफ से पटिए को उठा कर भगवान विष्णु से जागने का आह्वान करें-
उठो देव सांवरा, भाजी, बोर आंवला, गन्ना की झोपड़ी में, शंकर जी की यात्रा।  

 इस लोक आह्वान का भोला सा भावार्थ है - हे सांवले सलोने देव, भाजी, बोर, आंवला चढ़ाने के साथ हम चाहते हैं कि आप जाग्रत हों, सृष्टि का कार्यभार संभालें और शंकर जी को पुन: अपनी यात्रा की अनुमति दें।

मोर पंख का उपयोग

- प्राचीन काल से ही नजर उतारने व भगवान की प्रतिमा के आगे वातावरण को पवित्र करने के लिए भी मोर पंख का ही प्रयोग होता आया है.
- मोर पंख का उपयोग वशीकरण, कार्यसिद्धि, भूत बाधा, रोग मुक्ति, ग्रह वाधा, वास्तुदोष निग्रह आदि में महत्पूर्ण माना गया हैं,
- इसे सर पर धारण करने से विद्या लाभ मिलता है या सरस्वती माता के उपासक और विद्यार्थी पुस्तकों के मध्य अभिमंत्रित मोर पंख रख कर लाभ उठा सकते हैं.
- मंत्र सिद्धि के लिए जपने वाली माला को मोर पंखों के बीच रखा जाता हैं. 
- घर में अलग अलग स्थान पर मोर पंख रखने से घर का वास्तु बदला जा सकता है.
- नव ग्रहों की दशा से बचने के लिए भी होता है मोर पंख का प्रयोग. ग्रहों को शांत करने में मोर पंख आपकी सहायता कर सकता है.।
- आयुर्वेद में भी मोर के पंख से तपेदिक, दमा, लकवा, नजला तथा बांझपन जैसे रोगों का सफलतापूर्वक उपचार संभव होता है
- यही मोर का पंख हमारे ज्योतिष.शास्त्र एवं वास्तु शास्त्र के द्वारा मनुष्य जीवन में ाग्यशाली सिद्ध होता है – 
 
एक मोर का पंख हमारे जीवन कि दिशा बदलने में सहायक है।
  • घर के दक्षिण.पूर्व कोण में लगाने से बरकत बढती है व अचानक कष्ट नहीं आता है
  • मोर का पंख घर में रखने से सांप घर में प्रवेश नहीं करता
  • यदि मोर का एक पंख किसी मंदिर में श्री राधा.कृष्ण कि मूर्ती के मुकुट में 40 दिन के लिए स्थापित कर प्रतिदिन मक्खन.मिश्री का भोग सांयकाल को लगाए 41 वें दिन उसी मोर के पंख को मंदिर से दक्षिणा भोग दे कर घर लाकर अपने खजाने या लाकर्स में स्थापित करें तो आप स्वयं ही अनुभव करेंगे कि धन-सुख.शान्ति कि वृद्धि हो रही है सी रुके कार्य भी इस प्रयोग के कारण बनते जा रहे है।
  • काल.सर्प के दोष को भी दूर करने की इस मोर के पंख में अद्भुत क्षमता है काल.सर्प वाले व्यक्ति को अपने तकिये के खौल के अंदर 7 मोर के पंख सोमवार रात्री काल में डालें तथा प्रतिदिन इसी तकिये का प्रयोग करे और अपने बैड रूम की पश्चिम दीवार पर मोर के पंख का पंखा जिसमे कम से कम 11 मोर के पंख तो हों लगा देने से काल सर्प दोष के कारण आयी बाधा दूर होती है
  • बच्चा जिद्दी हो तो इसे छत के पंखे के पंखों पर लगा दे ताकि पंखा चलने पर मोर के पंखो की हवा बच्चे को लगे धीरे.धीरे हव जिद्द कम होती जायेगी।
  • मोर व सर्प में शत्रुता है अर्थात सर्प, शनि तथा राहू के संयोग से बनता है यदि मोर का पंख घर के पूर्वी और उत्तर. पश्चिम दीवार में या अपनी जेब व डायरी में रखा हो तो राहू का दोष की भी नहीं परेशान करता है तथा घर में सर्प मच्छर बिच्छू आदि विषेलें जंतुओं का य नहीं रहता है।

  • - नवजात बालक के सिर की तरफ दिन.रात एक मोर का पंख चांदी के ताबीज में डाल कर रखने से बालक डरता नहीं है तथा कोईभी नजर दोष और अला.बला से बचा रहता है ।
  • यदि शत्रु अधिक तंग कर रहें हो तो मोर के पंख पर हनुमान जी के मस्तक के सिन्दूर से मंगलवार या शनिवार रात्री में उसका नाम लिख कर अपने घर के मंदिर में रात र रखें प्रातःकाल उठकर बिना नहाये धोए चलते पानी में भी देने से शत्रुए शत्रुता छोड़ कर मित्रता का व्यवहार करने लगता है इस प्रकार के अनेकों प्रयोगों का धर्मशास्त्रों में वर्णन मिलता है ।

Wednesday, August 3, 2016

शंख का स्वास्थ्य,धर्म एवं ज्योतिष में उपयोग


स्वास्थ्य में महत्व :
  • शंख में १००% कैल्शियम है इसमें रात को पानी भर के पीने से कैल्शियम की पूर्ति होती है
  • शंख में पानी रख कर पीने से मनोरोगी को लाभ होता है उत्तेजना काम होती है।
  • शंख बजाने से योग की तीन किरयाए एक साथ होती है - कुम्भक, रेचक, प्राणायाम
  • शंख बजाने से हृदयाघात, रक्तचाप की अनियमितता, दमा, मंदाग्नि में लाभ होता है।
  • शंख बजाने से फेफड़े पुष्ट होते है।
  • शंख की ध्वनि से दिमाग व् स्नायु तंत्र सक्रिय रहता है।
धार्मिक महत्व :
  • दक्षिणावर्ती शंख को लक्ष्मी स्वरुप कहा जाता है इसके बिना लक्ष्मी जी की आराधना पूरी नहीं मानी जाती। सुख- सौभाग्ये की वृद्धि के लिए इसे अपने घर में स्थापित करे।
  • शंख में दूध भर कर रुद्राभिषेक करने से समस्त पापो का नाश होता है।
  • घर में शंख बजाने से नकारात्मक ऊर्जा का व् अतृप्त आत्माओ का वास नहीं होता है।
  • दक्षिणावर्ती शंख से पितरो का तर्पण करने से पितरो की शांति होती है ।
  • शंख से स्फटिक के श्री यन्त्र अभिषेक करने से लक्ष्मी की प्राप्ति होती है ।

ज्योतिष्ये महत्व :
  • सोमवार को शंख में दूध भर कर शिव जी को चढाने से चन्द्रमा ठीक होता है।
  • मंगलवार को शंख बजा कर सुन्दर काण्ड पढ़ने से मंगल का कु-प्रभाव काम होता है।
  • शंख में चावल भर के रखे और लाल कपडे में लपेट कर तिजोरी में रखये माँ अन्नपूर्णा की कृपा बनी रहती है।
  • बुधवार को शालिग्राम जी का शंख में जल व् तुलसा जी दाल कर अभिषेक करने से बुध ग्रह ठीक होता है।
  • शंख को केसर से तिलक कर पूजा करने से भगवन विष्णु व् गुरु की प्रसन्ता मिलती है।
  • शंख सफ़ेद कपड़े में रखने से शुक्र ग्रह बलि होता है।
  • शंख में जल ड़ाल कर सूर्ये देव को अर्घ्य देने से सूर्य देव प्रस्सन होते है।

अशुभ ग्रहों का उपाय

कुंडली में अगर निम्न गृह अशुभ है तो निम्न बीमारी देंगे अपनी महादशा या अंतर दशा में :-
1. सूर्य : मुँह में बार-बार थूक इकट्ठा होना, झाग निकलना, धड़कन का अनियंत्रित होना, शारीरिक कमजोरी और रक्त चाप।
2. चंद्र : दिल और आँख की कमजोरी।
3. मंगल : रक्त और पेट संबंधी बीमारी, नासूर, जिगर, पित्त आमाशय, भगंदर और फोड़े होना।
4. बुध : चेचक, नाड़ियों की कमजोरी, जीभ और दाँत का रोग।
5. बृहस्पति : पेट की गैस और फेफड़े की बीमारियाँ।
6. शुक्र : त्वचा, दाद, खुजली का रोग।
7. शनि : नेत्र रोग और खाँसी की बीमारी।
8. राहु : बुखार, दिमागी की खराबियाँ, अचानक चोट, दुर्घटना आदि।
9. केतु : रीढ़, जोड़ों का दर्द, शुगर, कान, स्वप्न दोष, हार्निया, गुप्तांग संबंधी रोग आदि।

अशुभ ग्रहों का उपाय किस प्रकार से करे:
1. सूर्य : बहते पानी में गुड़ बहाएँसूर्य को जल दे, पिता की सेवा करे या गेहूँ और तांबे का बर्तन दान करें.
2. चंद्र : किसी मंदिर में कुछ दिन कच्चा दूध और चावल रखें या खीर-बर्फी का दान करें, या माता की सेवा करे, या दूध या पानी से भरा बर्तन रात को सिरहाने रखें. सुबह उस दुध या पानी से किसी कांटेदार पेड़ की जड़ में डाले या चन्द्र के लिए चावल, दुध एवं चान्दी के वस्तुएं दान करें.
3. मंगल : बहते पानी में तिल और गुड़ से बनी रेवाडि़यां प्रवाहित करे. या बरगद के वृक्ष की जड़ में मीठा कच्चा दूध 43 दिन लगातार डालें। उस दूध से भिगी मिट्टी का तिलक लगाएँ। या ८ मंगलवार को बंदरो को भुना हुआ गुड और चने खिलाये , या बड़े भाई बहन के सेवा करे, मंगल के लिए साबुत, मसूर की दाल दान करें
4. बुध : ताँबे के पैसे में सूराख करके बहते पानी में बहाएँफिटकरी से दन्त साफ करे, अपना आचरण ठीक रखे ,बुध के लिए साबुत मूंग का दान करें., माँ दुर्गा की आराधना करें .
5. बृहस्पति : केसर का तिलक रोजाना लगाएँ या कुछ मात्रा में केसर खाएँ और नाभि या जीभ पर लगाएं या बृ्हस्पति के लिए चने की दाल या पिली वस्तु दान करें.
6. शुक्र : गाय की सेवा करें और घर तथा शरीर को साफ-सुथरा रखें, या काली गाय को हरा चारा डाले .शुक्र के लिए दही, घी, कपूर आदि का दान करें.
7. शनि : बहते पानी में रोजाना नारियल बहाएँ। शनि के दिन पीपल पर तेल का दिया जलाये ,या किसी बर्तन में तेल लेकर उसमे अपना क्षाया देखें और बर्तन तेल के साथ दान करे. क्योंकि शनि देव तेल के दान से अधिक प्रसन्ना होते है, या हनुमान जी की पूजा करे और बजरंग बाण का पथ करे, शनि के लिए काले साबुत उड़द एवं लोहे की वस्तु का दान करें.
8. राहु : जौ या मूली या काली सरसों का दान करें या अपने सिरहाने रख कर अगले दिन बहते हुए पानी में बहाए
9. केतु : मिट्टी के बने तंदूर में मीठी रोटी बनाकर 43 दिन कुत्तों को खिलाएँ या सवा किलो आटे को भुनकर उसमे गुड का चुरा मिला दे और 43 दिन तक लगातार चींटियों को डाले, या काला सफ़ेद कम्बल कोढियों को दान करें या आर्थिक नुक्सान से बचने के लिए रोज कौओं को रोटी खिलाएं. या काला तिल दान करे,

काले तिल के ये उपाय करने से दूर होता है दुर्भाग्य

उपाय 1
हर रोज एक लोटे में शुद्ध जल भरें और उसमें काले तिल डाल दें। अब इस जल को शिवलिंग पर "ऊँ नम: शिवाय" मंत्र जप करते हुए चढ़ाएं। जल पतली धार से चढ़ाएं और मंत्र का जप करते रहें। जल चढ़ाने के बाद फूल और बिल्व पत्र चढ़ाएं। इस उपाय से शुभ फल प्राप्त होने की संभावनाएं बढ़ती हैं।
उपाय 2
कुंडली में शनि के दोष हों या शनि की साढ़ेसाती या ढय्या चल रही हो तो किसी पवित्र नदी में हर शनिवार काले तिल प्रवाहित करना चाहिए। इस उपाय से शनि के दोषों की शांति होती है।
उपाय 3
दूध में काले तिल मिलाकर पीपल पर चढ़ाएं। इससे बुरा समय दूर हो सकता है। यह उपाय हर शनिवार को करना चाहिए।
उपाय 4
काले तिल का दान करें। इससे राहु-केतु और शनि के बुरे प्रभाव समाप्त हो जाते हैं। कालसर्प योग, साढ़ेसाती, ढय्या, पितृ दोष आदि में भी यह उपाय किया जा सकता है।
उपाय 5
हर शनिवार काले तिल, काली उड़द को काले कपड़े में बांधकर किसी गरीब व्यक्ति को दान करें। इस उपाय से पैसों से जुड़ी समस्याएं दूर हो सकती हैं।
उपाय 6
हर रोज शिवलिंग पर काले तिल अर्पित करें। इससे शनि के दोष शांत होते हैं। पुराने समय से चली आ रही बीमारियां भी दूर हो सकती हैं।
उपाय 7 
शनि दोषों और राहु-केतु के दोषों से बचने के लिए हर शनिवार नहाने के पानी में थोड़े से काले मिलाएं और फिर उस जल से स्नान करें। ज्योतिष की पुरानी मान्यताओं के अनुसार इस उपाय से शनि के दोषों से मुक्ति मिलती है। 
उपाय 8
घर में सुख-शांति नहीं रहती हो और हमेशा वाद-विवाद होते रहते हों तो ये उपाय करें। उपाय के अनुसार शनिवार को किसी पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं और उसमें काले तिल के तीन दाने डाल दें। यह उपाय हर शनिवार करें तो घर में वाद-विवाद कम हो सकते हैं। महीने में कम से कम दो बार करें ये उपाय 
उपाय 9
यदि आप शनि दोषों की कारण परेशानियों का सामना कर रहे हैं तो शनिवार के दिन किसी पीपल पर सफेद कपड़े का झंडा लगाएं। यह उपाय धन संबंधी कार्यों में शुभ फल प्रदान कर सकता है।
उपाय 10
किसी भी शनिवार की शाम को खड़ी उड़द के एक दाने पर थोड़ा सा दही और सिंदूर लगाएं और उसे किसी भी पीपल के नीचे रख आएं। वापस आते समय पीछे मुड़कर नहीं देखें। यह उपाय शनिवार से ही शुरू करना चाहिए। हर शनिवार यह उपाय करते रहें। निकट भविष्य में शनि कृपा से धन संबंधी कार्यों में लाभ मिल सकते हैं।

Monday, July 25, 2016

शिवमुट्ठी - सावन के उपाय जो किस्मत चमकाएं

सावन (श्रावण) मास में प्रत्येक सोमवार को शिव मुट्ठी चढ़ाई जाती है -
  • प्रथम सोमवार को शिवलिंग पर एक मुट्ठी कच्चे चावल को चढ़ाया जाता है |
  • दूसरे सोमवार को शिवलिंग पर एक मुट्ठी सफ़ेद तिल चढाने का नियम है |
  • तीसरे सोमवार को शिवलिंग पर एक मुट्ठी खड़े मूंग को चढ़ाया जाता है |
  • चौथे सोमवार को शिवलिंग पर एक मुट्ठी जौ चढाने का नियम है |
  • * ...और श्रावण मास में अगर पांचवां सोमवार भी आ जाता है, तो सतुआ चढ़ाने का महत्व हैं।
सावन माह में शिव पूजा में चढ़ाना बिल्वपत्र से भी ज्यादा पुण्य और फल देने वाला माना गया है।
- एक आंकड़े का फूल चढ़ाना सोने के दान के बराबर फल देता है,
- एक हजार आंकड़े के फूल के बराबर एक कनेर का फूल फलदायी,
- एक हजार कनेर के फूल के बराबर एक बिल्वपत्र फल देता है,
- एक हजार बिल्वपत्रों के बराबर एक द्रोण या गूमा फूल फलदायी,
- एक हजार गूमा के बराबर एक चिचिड़ा,
- एक हजार चिचिड़ा के बराबर एक कुश का फूल,
- एक हजार कुश फूलों के बराबर एक शमी का पत्ता,
- एक हजार शमी के पत्तो के बराबर एक नीलकमल,
- एक हजार नीलकमल से ज्यादा एक धतूरा और
- एक हजार धतूरों से भी ज्यादा एक शमी का फूल शुभ और पुण्य देने वाला होता है। इस तरह शमी का फूल शिव को चढ़ाना शिव भक्ति से तमाम मनचाही कामनाओं को पाने का सबसे श्रेष्ठ उपाय है

Monday, July 4, 2016

पित्र दोष निवारण - सरल उपाय

  • पीपल और बरगद के वृ्क्ष की पूजा करने से पितृ दोष की शान्ति होती है।
  • भोजन से पहले तेल लगी दो रोटी गाय को खिलाएं
  • श्री मद भागवत गीता का ग्यारहवां अध्याय का पाठ करें।
  • जब भी किसी तीर्थ पर जाएं तो अपने पितरों के लिए तीन बार अंजलि में जल से उनका तर्पण अवश्य ही करें ।
  • घर की दक्षिण दिशा की दीवार पर अपने दिवंगत पूर्वजों के फोटो लगाकर उन पर हार चढ़ाकर सम्मानित करना चाहिए तथा उनकी मृत्यु तिथि पर ब्राह्मणों को भोजन, वस्त्र एवं दक्षिणा सहित दान, पितृ तर्पण एवं श्राद्ध कर्म करने चाहिए
  • सोमवती अमावस्या के दिन पितृ दोष निवारण पूजा करने से भी पितृ दोष में लाभ मिलाता है।
  • सोमवती अमावस्या को दूध की खीर बना, पितरों को अर्पित करने से भी इस दोष में कमी होती है ।
  • सोमवती अमावस्या के दिन यदि कोई व्यक्ति पीपल के पेड़ पर मीठा जल मिष्ठान एवं जनेऊ अर्पित करते हुये “ऊँ नमो भगवते वासुदेवाएं नमः” मंत्र का जाप करते हुए कम से कम सात या 108 परिक्रमा करे तत्पश्चात् अपने अपराधों एवं त्रुटियों के लिये क्षमा मांगे तो पितृ दोष से उत्पन्न समस्त समस्याओं का निवारण हो जाता है।
  • प्रत्येक अमावस्या को बबूल के पेड़ पर संध्या के समय भोजन रखने से भी पित्तर प्रसन्न होते है।
  • प्रत्येक अमावस्या को गाय को पांच फल भी खिलाने चाहिए।
  • प्रतिदिन देवता और पितरों की पूजा स्थान पर जल से भरा कलश रखकर सुबह तुलसी या हरे पेड़ों में चढ़ाएं।
  • प्रतिदिन शिव लिंग पर जल चढ़ाकर महामृत्यूंजय का जाप करना चाहिए । माँ काली की नियमित उपासना से भी पितृ दोष में लाभ मिलता है। अगर कोई व्यक्ति माता काली का उपासक है तो किसी भी प्रकार का दोष उसकी जिन्दगी से दूर रहता है। 
  • प्रतिदिन  शाम के समय में दीप जलाएं और नाग स्तोत्र, महामृत्युंजय मंत्र या रुद्र सूक्त या पितृ स्तोत्र या नवग्रह स्तोत्र या दुर्गा सप्तशती या सुन्दर काण्ड का पाठ करें ! इससे भी पितृ दोष की शांति होती है। 
  • हर शनिवार और श्राद्धपक्ष को कौओं और मछलियों को चावल और घी मिलाकर बनाये गये लड्डू दीजिये।
  • हर शनिवार और श्राद्धपक्ष  को पीपल की जड़ में दोपहर में जल, दूध, गंगाजल, पुष्प, चावल, जौ, काले तिल,  चढ़ाएं और स्वर्गीय परिजनों का स्मरण कर उनसे आशीर्वाद मांगें।
  • श्राद्धपक्ष या वार्षिक श्राद्ध में ब्राह्मणों के लिए तैयार भोजन में पितरों की पसंद का पकवान जरुर बनाएं। 
  • पितृ पक्ष में पीपल की परिक्रमा अवश्य करें | अगर १०८ परिक्रमा लगाई जाएँ ,तो पितृ दोष अवश्य दूर होगा |
  • व्यक्ति को अपने घर के वायव्य कोण (N -W ) में  नित्य
    - सरसों
    का तेल में बराबर मात्रा में अगर का तेल मिलाकर दीपक पूरे पितृ पक्ष में नित्य लगाना चाहिए, दिया पीतल का हो तो ज्यादा अच्छा है ,
    - वर्ष की प्रत्येक अमावस्या को दोपहर के समय गूगल की धूनी पूरे घर में सब जगह घुमाएं ,शाम को आंध्र होने के बाद पितरों के निमित्त शुद्ध भोजन बनाकर एक दोने में सारी सामग्री रख कर किसी बबूल के वृक्ष अथवा पीपल या बड़ कि जद में रख कर आ जाएँ,पीछे मुड़कर न देखें.
    - नित्य प्रति घर में देसी कपूर जाया करें|
    पित्र दोष निवारण मन्त्र ( Pitra Dosh Nivaran Mantra ) :
      • मन्त्र 1 – ॐ सर्व पितृ देवताभ्यो नमः ।
      • मन्त्र २ – ॐ प्रथम पितृ नारायणाय नमः ।।